भारत मे समलैंगिक शादियों को मिलेगी मान्यता ? केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

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नई दिल्ली: समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। यह सुनवाई प्रमुख न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच ने की।

इस दौरान शीर्ष अदालत समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के मामले का परीक्षण करने के लिए सहमत हो गया है। शीर्ष अदालत फैसला करेगा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान की जा सकती है या फिर नहीं।

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सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अटार्नी जनरल को भी नोटिस जारी किया गया है। सभी से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। दरअसल, हैदराबाद के रहने वाले एक Gay कपल ने अपनी याचिका में मांग की है कि समलैंगिक विवाह को भी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत लाया जाए। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा हाईकोर्ट भी तो मामले को सुन रहा है। इस पर वकील संजय किशन कौल ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय में यह मामला दो वर्षों से लंबित चल रहा है। यह जनहित का मसला है, क्योंकि यह संवैधानिक अधिकार का मामला है।

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रिपोर्ट के अनुसार, वकील मुकुल रोहतगी ने कहा है कि यह नवतेज और पुट्टुस्वामी फैसले से जुड़ा मसला है, जो अधिकारों से संबंधित है। हम धर्म से संबंधित हिन्दू मैरिज एक्ट पर नहीं जा रहे। यही कह रहे हैं कि विशेष विवाह अधिनियम में यह स्पष्ट प्रावधान किया जाए। हैदराबाद में रहने वाले दो समलैंगिक पुरुषों सुप्रियो चक्रवर्ती और अभय डांग ने अपनी याचिका में कहा है कि अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का अधिकार LGBTQ+ नागरिकों को भी दिया जाना चाहिए। सुप्रियो और अभय की जोड़ी करीब 10 वर्षों से एकसाथ है।

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