शत्रु संपत्तियों पर कब्जा करने वालो पर CM योगी का कड़ा एक्शन, कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाएं जीरो टॉलरेंस

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अवैध रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। बता दें कि इस अभियान को चलाने के लिए और शत्रु संपत्तियों पर कब्जा करने व अतिक्रमण को हटाने के लिए एक नोडल अधिकारी को भी नियुक्त किया जाएगा।

राज्य मे मौजूद कुल 5,936 शत्रु संपत्तियों मे से 1826 अवैध कब्जे मे है। सीएम योगी ने बैठक मे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करने के सख्त निर्देश दिए है। सीएम योगी ने कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों मे शत्रु संपत्तियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की उपेक्षा के चलते जो भी मूल्यवान संपत्तियां अवैध कब्जे मे है, उन्हें मुक्त किया जाए।

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अवैध कब्जे मे इस जिले का नाम सबसे ऊपर।

वहीं यूपी के भूलेख की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक करीब 1,467 शत्रु संपत्तियों पर माफिया और अन्य का कब्जा है। इसके अलावा करीब 369 पर सह-अधिकारियों का कब्जा है। बता दें कि कांग्रेस, जनता पार्टी, बसपा और समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल के दौरान 424 संपत्तियों पर किराएदारों का कब्जा है और उन पर सिर्फ नाममात्र की दरें लगी है। प्रदेश मे करीब 2250 शत्रु संपत्तियों पर कब्जा है। वहीं सबसे अधिक अवैध कब्जा करने वाले जिलों मे शामली का नाम सबसे ऊपर है। साथ ही लखनऊ सहअधिकारियों द्वारा किए गए कब्जे मे सबसे पहले नंबर पर है। लखनऊ मे किराएदारों के कब्जे मे सबसे ज्यादा संपत्ति है।

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संपत्तियों का किया जाएगा पुनर्मूल्यांकन।

इसके अलावा योगी सरकार किराए की संपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन भी करने जा रही है। दशकों से किराएदार इन पर अपना कब्जा जमाए हुए है। वही मौजूदा बाजार भाव को देखते हुए शत्रु संपत्तियों का आकलन भी किया जाएगा। आकलन करने के बाद इन पर किराया दर तय किया जाएगा। वहीं अवैध कब्जे के मामले मे सबसे आगे चल रहे जिला शामली मे 482 शत्रु संपत्तियां हैं, जिनमें से 268 अवैध रूप से कब्जे मे है। इसके बाद दूसरे नंबर पर कौशांबी है, जहां पर 456 शत्रु संपत्तियां है। इनमें से 197 पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।

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सरकारी विभाग को सौंपा जाता है संपत्तियों का स्वामित्तव।

वहीं सीतापुर मे 378 शत्रु संपत्तियां है, जिनमें से 111 अवैध रूप से है। योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ मे 361 शत्रु संपत्तियों की पहचान की है। इसमें 105 किराएदारों के कब्जे मे है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर मे 274 शत्रु संपत्ति है। जिनमें 85 किराएदारों के कब्जे मे है। इन संपत्तियों का स्वामित्तव सरकारी विभाग को सौंपा जाता है। इसे भारत मे शत्रु संपत्ति के संरक्षक के तौर पर जाना जाता है। बता दें कि वर्ष 1965 मे भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद वर्ष 1968 मे शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू किया गया था।

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